Fact Check
क्या पीएम मोदी की कूटनीति ने रद्द करवा दिया कतर एयरवेज का लाइसेंस? भ्रामक है यह दावा
पैगंबर मोहम्मद के अपमान के खिलाफ कतर सहित कई अरब देशों की नाराजगी को लेकर बीजेपी की आलोचना हो रही है. आलोचकों का कहना है कि मोदी सरकार और बीजेपी ने भारत की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बदनामी करवा दी है. लेकिन सोशल मीडिया पर एक खबर के स्क्रीनशॉट के जरिए कहा जा रहा है कि मोदी सरकार, कूटनीतिक तरीकों से इस मामले का हल निकाल रही है और इसके नतीजे दिखने लगे हैं.


वायरल स्क्रीनशॉट एक खबर का है, जिसकी हेडलाइन में लिखा है, “गहराते राजनयिक संकट के बीच सऊदी अरब, बहरीन ने कतर एयरवेज का लाइसेंस रद्द किया.” सोशल मीडिया पर इस खबर को हाल फिलहाल का बताया जा रहा है. कहा गया है कि पैगंबर मोहम्मद वाले मामले में भारत की आलोचना करना कतर को महंगा पड़ा. इस खबर को शेयर करते हुए फेसबुक और ट्विटर यूजर्स तंज कस रहे हैं कि पीएम मोदी की कूटनीति की वजह से कतर एयरवेज का लाइसेंस रद्द हो गया.
दरअसल, बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा और दिल्ली बीजेपी के पूर्व मीडिया सेल हेड नवीन जिंदल ने कुछ दिनों पहले पैगंबर मोहम्मद पर विवादित बयान दिए थे. इन बयानों के खिलाफ अरब के कई देशों ने आपत्ति जताई और अपना विरोध दर्ज कराया. मामले में कतर ने तो अपने देश में मौजूद भारतीय राजदूत को भी तलब किया. इसके जवाब में भारत में बीजेपी समर्थक ट्विटर पर #BoycottQatarAirways ट्रेंड करवाने लगे. इसी कड़ी में सोशल मीडिया पर यह स्क्रीनशॉट वायरल हो रहा है.
Fact Check/Verification
वायरल स्क्रीनशॉट में लिखी हेडलाइन को गूगल पर सर्च करने पर हमें इंडिया टीवी की एक खबर मिली, जिसमें ठीक ऐसी ही हेडलाइन देखी जा सकती है. यह खबर 7 जून 2017 को प्रकाशित हुई थी. सच्चाई यहीं सामने आ जाती है कि वायरल हो रहा है ये स्क्रीनशॉट पांच साल पुरानी एक खबर का है.

इंडिया टीवी की खबर के अनुसार, उस समय सऊदी अरब, यूएई, मिस्त्र, बहरीन और यमन ने कतर पर राजनयिक प्रतिबंध लगा दिए थे. इन देशों का आरोप था कि कतर चरमपंथ का समर्थन कर रहा है. इस मामले को लेकर उस समय कई और भी खबरें छपी थीं. हालांकि, जनवरी 2021 में कतर और नाराज अरब देशों के बीच एक समझौता हुआ, जिसके बाद कतर एयरवेज की इन देशों में उड़ानें दोबारा शुरू हो गईं थीं.
Conclusion
यहां हमारी पड़ताल में यह स्पष्ट हो जाता है कि कतर एयरवेज का लाइसेंस रद्द होने वाली इस खबर का पैगंबर मोहम्मद के अपमान वाले बवाल से कोई संबंध नहीं है. यह खबर पांच साल पुरानी है, जिसे अभी का बताकर शेयर किया जा रहा है.
Result: False Context/Missing Context
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Our Sources
Report of India TV, published on June 7, 2017
Report of Hindustan Times, published on January 2021
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