दिल्ली से बिग ब्रेकिंग न्यूज़। दलाल मीडिया को सुप्रीम कोर्ट की फटकार निजामुद्दीन मरकज़ को युद्ध स्तर पर कोरोना का मुद्दा बनाकर भारत का माहौल खराब करने वाली मीडिया को सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी और मीडिया को लगाई कड़ी फटकार। कहा ऐसी ख़बरें चलाकर भारत का माहौल ख़राब न करें।
देश में कोरोना महामारी के संकटकाल में जिस तरह मरकज के जमातियों की एंट्री हुई वह जगजाहिर है। शुरुआती दिनों में कुल मरीजों का एक बड़ा हिस्सा तब्लीगी जमात के लोगों से जुड़ा हुआ पाया गया था। लगातार कोरोना पॉजिटिव मरीजों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर मीडिया ने भी मामले को काफी तूल दिया। जमातियों द्वारा देश के कई कोनों से डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ के साथ बदसलूकी की ख़बरें आयी तो वहीँ कुछ अफवाह भी मीडिया की सुर्खियां बनी। इसी क्रम में दावा किया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने जमातियों पर रिपोर्टिंग के लिए मीडिया को लताड़ लगाई है।
फैक्ट चेक:
निजामुद्दीन मरकज से निकले जमातियों में एक तरफ जहां कोरोना संक्रमण के मामले तेजी से सामने आये तो वहीं उनके संपर्क में आने वाले भी कोरोना की जद में आ गए। कई राज्यों में फैले जमातियों की वजह से देश पर कोरोना का संकट गहरा गया है। कई राज्यों ने जमातियों को खोजने लिए लोकल इंटेलिजेंस से लेकर इनाम तक घोषित किया तो वहीं कुछ राज्यों ने तथ्य छिपाने पर सजा का भी ऐलान किया है। गौरतलब है कि इस तरह की ख़बरें मीडिया प्रमुखता से दिखा रहा है। सोशल मीडिया पर हो रहे दावे के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने तब्लीगी जमात पर लगातार हो रही रिपोर्टिंग पर मीडिया को कड़ी फटकार लगाई है। जमातियों को लेकर मीडिया में जहां कई सही ख़बरें संचालित की गईं तो वहीं कुछ फेक ख़बरें भी सामने आने से ऐसा लगा कि हो सकता है कि देश की सर्वोच्च अदालत ने इस तरह का कोई आदेश दिया ही हो। खोज के दौरान पता चला कि कुछ ट्विटर यूजर्स ने भी इस दावे को शेयर किया है।
इसके अलावा हमारे एक रीडर ने WhatsApp पर सन्देश भेजकर इसकी सत्यता प्रमाणित करने को कहा था।
कुछ कीवर्ड्स के माध्यम से खोजने पर कुछ समाचार माध्यमों द्वारा प्रकाशित खबरों के लिंक खुलकर सामने आये।
NDTV ने अपने शीर्षक ‘निज़ामुद्दीन मरकज मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, जमीयत-उलमा-ए-हिंद ने दायर की याचिका के हवाले से खबर प्रकाशित की है। खबर के मुताबिक जमीयत ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि वो केंद्र सरकार को मीडिया द्वारा फेक खबरें चलाने से रोकने का निर्देश दे। खबर के मुताबिक याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि मीडिया के एक वर्ग में इस मामले का साम्प्रदायीकरण किया जा रहा है। याचिका में कहा गया है कि इससे भारत के पूरे मुस्लिम समुदाय का जीने का अधिकार प्रभावित हो रहा है।
Coronavirus Updates: जमीयत-उलमा-ए-हिंद ने निज़ामुद्दीन मरकज मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की. याचिका में कहा गया है कि मीडिया के एक वर्ग में इस मामले का सांप्रदायिकरण किया जा रहा है. याचिका में कहा गया है कि इससे भारत के पूरे मुस्लिम समुदाय का जीने का अधिकार प्रभावित हो रहा है.
इस खबर से इस बात की पुष्टि नहीं हुई कि सोशल मीडिया में किया जा रहा दावा सही है लिहाज़ा पड़ताल जारी रखी। इस दौरान अमर उजाला द्वारा प्रकाशित एक लेख प्राप्त हुआ। अपने शीर्षक, ‘तब्लीगी जमात के मीडिया कवरेज पर अंतरिम फैसला देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, कहा- प्रेस का गला नहीं दबाएंगे’ के माध्यम से पूरे मसले पर प्रकाश डाला है। लेख में आगे लिखा कि कोर्ट किसी भी परिस्थिति में प्रेस का गला नहीं दबा सकता लिहाजा इस मसले पर सुनवाई 2 सप्ताह के बाद होगी। पूरे मामले पर वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश एस.ए बोबडे, न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति एम एम शांतनगौडर की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने भारतीय प्रेस परिषद को भी पार्टी बनाने की बात कही और कोई भी अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने तब्लीगी जमात के मीडिया कवरेज को लेकर दायर याचिका पर कोई अंतरिम निर्णय देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि वह प्रेस का गला नहीं घोटेगा। दो सप्ताह बाद कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई की जाएगी। दरअसल, कोरोना वायरस महामारी फैलने को हालिया
इसी खबर को deccanherald ने भी प्रमुखता से प्रकाशित किया है। खबर में कहा गया है कि याचिका की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मीडिया को चुप नहीं कराया जा सकता।
“We can’t gag the media,” said the Supreme Court on Monday on a plea to stop “fake” news being disseminated by some TV channels after Nizamuddin Markaz incident related to Tablighi Jamat. A bench presided over by Chief Justice S A Bobde told advocate Ejaz Maqbool, appearing for ‘Jamiat Ulama-I-Hind’, to make the Press Council of India as a party to its petition.
पड़ताल के बाद यह साफ हो गया कि सुप्रीम कोर्ट ने तब्लीगी जमात पर रिपोर्टिंग को लेकर मीडिया पर फटकार नहीं लगाई है बल्कि साफ किया है कि मीडिया का गला नहीं दबाया जा सकता। हमारी पड़ताल में वायरल दावा भ्रामक साबित हुआ।
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